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Wednesday, July 28, 2010

Day 230

एक रजा के बेटे को लेकर, उडने वाला घोड़ा,
देश देश की सैर की खातिर, अपने घर से निकला
उडते उडते, चलते चलते, थके जो उसके पाव,
एक जगह पर बेठ गया वोह, देख के ठंडी छाव!!!

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